बढ़ते अपराध --घटती प्राथमिकताएँ

भारत में बच्चो की संख्या 47 करोड से अधिक है, जो दुनिया के अन्य किसी भी देश में बच्चो की तुलना में सबसे ज्यादा है| यह दुःख की बात है की इनमे से अनेक बच्चे सामाजिक- आर्थिक तथा ऐतिहासिक कारणों से अनेक प्रकार के अभावो से ग्रस्त है और ये भेदभाव, उपेक्षा, और शोषण के सहज शिकार हो जाते है| इनमे से बहुत से बच्चो के मातापिता के पास आजीविका के बहुत कम साधन है और जिसके चलते इन बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है| ऐसी परिस्थितियों में कई बार माता-पिता को बच्चो को छोड़कर काम पर जाना पड़ता है ऐसे में बच्चे देखभाल के अभाव में हिंसा, उपेक्षा और शोषण के शिकार हो जाते है|

बच्चो के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा अब इस देश में बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है | औद्योगिकीकरण, उदारीकरण, अंतरराज्यीय और ग्रामीण और शहर से पलायन, आर्थिक गरीबी, परिवार का टूटना इत्यादि की वजह से भी बच्चे वंचितपन का शिकार बन रहे है|

भारत के संविधान में बच्चों तथा उनके अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया है | हमने संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते में दस्तखत किये है| इस समझौते में एक प्रमुख अधिकार सुरक्षा का अधिकार है जिसके तहत बच्चो को यह अधिकार है की उनकी सही देखभाल हो, लैंगिक दुर्व्यवहार, और अमानवीय व्यवहार से वे महफूज रहें, बच्चो को ऐसे कार्यों से सुरक्षित रखा जाये जो खतरनाक हो या जिससे उनका स्वास्थ्य या शिक्षा प्रभावित होती है| इसी तरह से सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चो का अपरहण तथा विक्रय न हो|

केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय उत्पीडन रिपोर्ट 2007 के अनुसार भारत में हर तीन में से एक बच्चा शारीरिक हिंसा का शिकार होता है जिसमे 73 फीसदी लड़के और 65 फीसदी लड़कियां है |

सभी बच्चों को सुरक्षा और गरिमा के साथ जीने के लिए सुरक्षित माहौल मिले एवं यह सुनिश्चित हो कि सभी बच्चे स्कूल जायें, बच्चों के लिए बनाये गए कानूनों पर अमल ठीक तरह से हो, नीति निर्धारक बच्चो के मुद्दों को प्राथमिकता दें| परन्तु दुखद यह है कि ऐसा न होने की वजह से बच्चों  के ऊपर होने वाले अपराध के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है | 

हाल ही में एनसीआरबी जारी की गयी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बच्चो के अपराध में 53 प्रतिशत का इजाफा हुआ है| वर्ष 2013 में बच्चों के ऊपर अपराध के 58224 मामले थे जो कि वर्ष 2014 में 89423 मामले दर्ज हुए|

इन आंकड़ों में सबसे ऊपर मध्यप्रदेश 15085 अपराधों के साथ है| दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश है जिसमे 14835 मामले दर्ज हुए है वही तीसरे नंबर पर दिल्ली है जिसमे 9350 मामले दर्ज हुए है

रोली शिवहरे,विकास संवाद, भोपाल

वर्ष -2015

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