कृषि और किसान के समक्ष चुनौती – विभिन्न पहलू

 

कृषि और किसान के समक्ष चुनौती – विभिन्न पहलू  

(सन्दर्भ – मध्यप्रदेश में खेती)

 चर्चा के लिए पर्चा 1

  • मध्यप्रदेश में दिसंबर 2015 की स्थिति में बैंकों के द्वारा दिया गया किसान कर्जा 60977 करोड़ था, यह दिसंबर 2016 की स्थिति में मध्यप्रदेश में कृषि के लिए कुल सावधि और फसल कर्ज 81228 करोड़ रूपए हो गया. इसमें से फसल के लिए ऋण 56047 करोड़ रूपए था.
  • क़र्ज़ लेने वाले किसानों पर औसतन 1.05 लाख रूपए का क़र्ज़ है.
  • मध्यप्रदेश में बैंकों द्वारा जारी कुल अग्रिम/ऋण में से खेती के लिए अग्रिम/ऋण का हिस्सा 36.60 प्रतिशत है; किन्तु छोटे और मझौले किसानों को कुल ऋण में से केवल 11.33 प्रतिशत हिस्सा ही दिया गया.
  • मध्यप्रदेश में वर्ष 2007 से 2012 के बीच में 9.41 लाख भैंसें कम हो गयी. राज्य में कुल पशुधन में 23.13 लाख की कमी आई.
  • मध्यप्रदेश में वर्ष 2001 से 2016 के बीच 9 साल सूखे के साल रहे.
  • राज्य में फल का उत्पादन दो गुना, सब्जी का उत्पादन 4 गुना और मसालों का उत्पादन 11 गुना बढ़ गया.
  • खुले बाज़ार में दलहन न्यूनतम समर्थन मूल्य की तय राशि से 35 प्रतिशत कम में खरीदे जा रहे हैं.
  • यहाँ सकल राज्य घरेलु उत्पाद में कृषि का योगदान लगभग 29 प्रतिशत हो गया है.
  • वर्ष 2001 से 2015 के बीच 19768 किसानों ने आत्महत्या कर ली.

विकास संवाद, भोपाल
वर्ष -अगस्त 2017

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