जन घोषणा पत्र-मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव-2013

लोकतंत्र में राजनीति ,राजनीति में चुनाव और चुनाव में लोगों की भूमिका : भारत की शासन व्यवस्था में इस त्रिकोण का बहुत महत्व हैं |हम मानते है कि पिछले साढ़े छ  दशकों में इस त्रिकोण में से केवल एक भुजा -राजनीति में चुनाव ही सक्रिय रही हैं | लोकतंत्र और लोग इसमें से लगभग बाहर ही रहे हैं | यदि बीते कुछ सालों का विशलेषण करें तो हमें पता चलता है कि भीतर छिपा असंतोष ,फिर चाहे वह भ्रष्टाचार के सन्दर्भ में हो या फिर जन -विरोधी विकास के सन्दर्भ में,उभर कर आया है | इसमे समाज ने अपनी-अपनी तरह से अपना पक्ष रखा है | ऐसे माहौल में  हम यह भी मानते है कि चुनावों की पूरी प्रक्रिया मे समाज का सक्रिय होना भी जरुरी है| इन्ही चुनावों में समाज किसी न् किसी को जनमत देता हैं | इसी जनमत के आधार पर सरकार बनती है और नीतियां बनाती और क्रियान्वित भी करती है | अक्सर नीतियां के बन जाने और सरकार की प्राथमिकताओं में से लोगों के बाहर हो जाने के बाद हम में से ज्यादातर साथी प्रतिक्रिया करते हैं| अब जरुरी है कि हम ऐसी व्यवस्था की दिशा में बढ़ें जहाँ से भावी सरकार की प्राथमिकताएं तय होती हैं -यानी सही,पारदर्शी और जवाबदेय चुनाव के लिए पहल |

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